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क्या गठबंधन की डोर होगी ग़ैर कांग्रेस के हाथ ?

Posted On 15 Apr, 2017 में

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1980 मैं पैदा हुई बीजेपी, जिसे 1984 के आम चुनाव में केवल दो सीट मिली थी। आज देश की राजनीति में सबसे बड़ी ताक़त है। 1885 में वजूद में आई देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस, जिसे 1984 में 404 सीट मिली थी, हाशिये पर जाती दिखाई पड़ रही है। इसे 2014 चुनाव में 44 सीट मिली।

भाजपा की सबसे बड़ी ताक़त हैं नरेन्द्र मोदी। ख़ास अंदाज़ है मोदी के भाषण का, जनता से संवाद का। नरेन्द्र मोदी जो कुछ भी बोलते हैं ऐसा लगता है वो सबकुछ हो रहा है। लोग उनकी बातों पर भरोसा करते आए हैं, और विश्वास कर रहे हैं।

दिल्ली के चुनाव में भाजपा 70 में से सिर्फ़ 3 सीट ला सकी थी, फिर भले ही बिहार में इसे जीत नहीं मिली। मगर इसने असम, मणिपुर, उत्तराखंड, गोवा, और उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई।

केन्द्र की राजनीति में यूपी का अमूल्य योगदान रहता है। क्योंकि 403 विधानसभा सीटों वाले इस सूबे से 80 सांसद लोकसभा में जाते हैं, जहां से अभी 71 बीजेपी के हैं। 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में जिस तरह भाजपा का प्रदर्शन रहा, ये वाक़ई ज़बरदस्त जीत है।

2019 में आम चुनाव होंने हैं। बीजेपी काफ़ी तेज़ी से मज़बूत होती नज़र आ रही है। मोदी इस मज़बूती का सबसे बड़ा नाम हैं। वहीं लोकतंत्र में विपक्ष की अहम भूमिका होती है। लोकतंत्र को बचाने और सरकार को भटकने से रोकने के लिए मज़बूत विपक्ष का होना बहुत ज़रूरी है।

अगर विपक्ष न हो तो लोकतंत्र और राजतंत्र में कोई अंतर नहीं रहेगा। जिस तरह राजतंत्र में राजा अपनी मर्ज़ी चलाता है, वैसे ही लोकतंत्र में सरकार अपनी मर्ज़ी करेगी। कम से कम 5 साल तो सरकार बे लगाम रह ही सकती है, जबतक चुनाव में जनता फिर से फ़ैसला न करे। पर मज़बूत विपक्ष सरकार पर एक तरह का लगाम होता है।

मौजूदा हालात में विपक्ष बहुत ही कमज़ोर हो चुका है। अगर भारत की राजनीति पर नज़र डाली जाए तो नरेन्द्र मोदी के सिवा दूसरा प्रधानमंत्री का उम्मीदवार न ही बीजेपी में है और न ही किसी राजनीतिक पार्टी में।

जब मौक़ा मिला तो राहुल गांधी ने गंवा दिया। जब मनमोहन सिंह की सरकार पहली बार आई तो राहुल गांधी ने कोई भी मंत्रालय नहीं लिया और राजनीति सीखने की बात की। यहां तक की दूसरे कार्यकाल में भी वो सीख ही रहे थे। जबकि वो राजनीति में काफ़ी दिनो से सक्रिय रहे हैं।

राजीव गांधी वैसे राजनीति से दूर रहे थे मगर जब हालात हुए तो 40 वर्ष की आयु में देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने। पर राहुल गांधी 40 के क़रीब होकर भी किसी मंत्रालय को संभालने के लायक ख़ुद को नहीं समझ पाए। ज़ाहिर है, जब वो ख़ुद को इस लायक नहीं समझते तो जनता उनपर भरोसा कैसे करे ?

देश की सबसे बड़ी अगर कोई राजनीतिक पार्टी है तो वो भाजपा और कांग्रेस है। भाजपा तो अभी अपनी असीम ताक़त के साथ मैदान  में हुंकार रही है, वहीं कांग्रेस को मज़बूत सीपा सालार की ज़रूरत है।

मौजूदा हालात में अकेले कांग्रेस या किसी राजनीतिक पार्टी में वो दम नहीं कि भाजपा का सामना कर सके। ज़रूरत है एक मज़बूत गठबंधन की। मगर बात जो सबसे अहम है, वो ये कि गठबंधन की बागडोर किसके हाथ में हो। अगर ये गठबंधन की डोर ग़ैर कांग्रेस के हाथ में होती है तो ये कांग्रेस के अहं को धक्का होगा। मगर कांग्रेस में कोई ऐसा चेहरा नहीं दिखता जिसे गठबंधन में आने वाली पार्टियां अपना नेता मान लें।अगर नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा को टक्कर देना है, तो सारी सेक्युलर पार्टियों को मिलकर सोचना होगा।

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